रुद्रप्रयाग उत्तराखंड

रुद्रप्रयाग से चन्द्र शिला तक अलकनंदा और मंदाकिनी के मध्य भू भाग को स्कंद पुराण में तुंग क्षेत्र कहा गया है। इस तुंग क्षेत्र में युगों युगों से स्थापित तीन शिवालयों ( चन्द्र) शिला तुंगनाथ, फलासी तुंगनाथ, नारी तुंगनाथ) को तुंगनाथ नाम से जाना जाता रहा है। यद्यपि द्वापरयुग में चन्द्र शिला तुंगनाथ में भगवान शिव द्वारा बाहु दर्शन देकर इस तीर्थ को तृतीय केदारनाथ के नाम से भी जाना जाता है लेकिन इस तीर्थ का वर्णन द्वापरयुग से पूर्व त्रेतायुग में भी आया है। वही सतयुग में चन्द्रमा के तप का सम्बंध भी इस तीर्थ से है। वहीं स्कन्द पुराण में सत्यतार नमक स्थान में तारागणों के द्वारा तुंगनाथ भगवान की तपस्या का वर्णन है। तुंग क्षेत्र के ये तीनों तीर्थों का तुंगनाथ नाम से प्रसिद्ध होना इनकी युगों युगों की प्राचीनता को प्रमाणित करता है। जहां तक चोपता नाम का जुड़ा होना है वह महज एक भौगोलिक संयोग है। चारों ओर से चौकस हल्की ढालदार भूमि जिसे प्राचीन गढ़वाली भौगोलिक नामकरण में चोपता कहा जाता है दोनो ही तीर्थों में होने के कारण यह नाम स्थान भी दुर्लभ संयोग ही है। चोपता, चोपड़ा, लगभग एक ही प्रकार की भौगोलिक स्थलाकृति हैं।
हर हर महादेव 🔱🌹🙏
जय देव भूमि उत्तराखंड 🚩

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